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2 अमरोहा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात बिछने लगी है और इसी के साथ कई सीटों पर नए चेहरों को लेकर चर्चाएं तेज हो रही हैं। इन्हीं में से एक है अमरोहा विधानसभा सीट, जहां समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता महबूब अली का लंबे समय से दबदबा रहा है। लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ पुराने सियासी समीकरणों की नहीं, बल्कि क्रिकेट के मैदान पर अपनी पहचान बनाने वाले भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की भी है। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी से शमी की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि क्या 2027 में अमरोहा की सियासी पिच पर कोई नया खिलाड़ी उतर सकता है?हालांकि, मोहम्मद शमी के चुनाव लड़ने या राजनीति में प्रवेश को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि चर्चाएं आगे चलकर किसी राजनीतिक फैसले में बदलती हैं या फिर महज अटकलें बनकर रह जाती हैं।

अमरोहा विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। यहां अलग-अलग दौर में कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी और भाजपा ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई। हालांकि, 2002 के बाद महबूब अली का प्रभाव लगातार बढ़ता गया और उन्होंने इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली।महबूब अली ने 2007, 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लगातार जीत दर्ज की। लगातार चार चुनावों में जीत ने उन्हें अमरोहा की राजनीति का एक मजबूत चेहरा बना दिया है।2022 के विधानसभा चुनाव में महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के राम सिंह को 57,699 वोट हासिल हुए। इस तरह महबूब अली ने 71,036 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। यह आंकड़ा बताता है कि अमरोहा में सपा की चुनौती कितनी मजबूत रही है। ऐसे में 2027 में उनके सामने किसी भी पार्टी के लिए मुकाबला आसान नहीं होगा।

अमरोहा की सियासत में नया मोड़ तब चर्चा में आया, जब सितंबर 2026 में मोहम्मद शमी और RLD प्रमुख जयंत चौधरी की मुलाकात के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुईं। चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि शमी या उनके भाई हसीब अहमद को RLD चुनावी मैदान में उतार सकती है।हालांकि, इन संभावनाओं की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न ही शमी ने अमरोहा से विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक समीकरण के तौर पर ही देखा जा रहा है।अगर RLD किसी नए चेहरे पर दांव लगाती है, तो पार्टी के सामने उसे स्थानीय स्तर पर मजबूत बनाने और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता बढ़ाने की चुनौती होगी। क्रिकेट की लोकप्रियता राजनीतिक समर्थन में कितनी बदल पाएगी, यह भी अहम सवाल होगा।

अमरोहा विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके साथ ही दलित मतदाताओं और अन्य जातीय समूहों का समर्थन भी जीत-हार का अंतर तय कर सकता है। महबूब अली की लगातार जीत के पीछे उनका स्थानीय राजनीतिक आधार भी अहम माना जाता है।भाजपा के लिए जहां पिछले चुनाव के प्रदर्शन से आगे निकलना चुनौती होगी, वहीं RLD को नए चेहरे के साथ संगठन और सामाजिक समीकरणों को साधना पड़ेगा। दूसरी ओर, सपा की कोशिश अपने मजबूत आधार को बरकरार रखने की होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महबूब अली 2027 में भी अपना सियासी किला बचा पाएंगे? क्या भाजपा अमरोहा में वापसी की राह तलाशेगी, या RLD किसी नए चेहरे के जरिए मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश करेगी?मोहम्मद शमी के नाम को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हैं, लेकिन आधिकारिक ऐलान के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल अमरोहा की सियासी पिच पर नजरें टिकी हैं और 2027 का चुनाव तय करेगा कि यहां पुराना दबदबा कायम रहता है या नए समीकरण राजनीति की दिशा बदलते हैं।

रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।

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