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5 11वीं स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप का शुभारंभ, विज्ञान मंत्री अनिल कुमार और मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने उपग्रह तकनीक के इस्तेमाल पर दिया जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने के लिए अंतरिक्ष तकनीक और उपग्रह आधारित सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि, शहरी विकास, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन और बुनियादी ढांचे की बेहतर योजना तैयार करने में इन तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसी उद्देश्य से लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में दो दिवसीय 11वीं स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप का शुभारंभ किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार और मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की उपस्थिति में हुआ। कार्यशाला का आयोजन रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर, उत्तर प्रदेश ने भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के इन-स्पेस और प्रदेश के नगर विकास विभाग के सहयोग से किया है।

किसानों की खेती से लेकर आपदा प्रबंधन तक होगा स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने देशभर से आए इन-स्पेस विशेषज्ञों और इंडस्ट्री पार्टनर्स से आधुनिक अंतरिक्ष तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से प्रदेश में कृषि व्यवस्था को बेहतर बनाने, सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में पैदावार बढ़ाने और सूखा व बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने में मदद मिल सकती है।उन्होंने गवर्नेंस, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा नेटवर्क और बुनियादी ढांचे की वैज्ञानिक योजना तैयार करने में भी स्पेस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर दिया। सुरक्षित पुलों, सड़कों और नहरों की योजना बनाने में इन तकनीकों का उपयोग प्रदेश के विकास को नई दिशा दे सकता है।मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग विकसित उत्तर प्रदेश-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

सभी भूखंडों की जियोटैगिंग पर मुख्य सचिव का जोर

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश में सभी भूखंडों की जियोटैगिंग कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को अपने खेत की वास्तविक सीमाओं की जानकारी मिल सकेगी और भूमि विवादों के निस्तारण में भी आसानी होगी।उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस दिशा में भू-राजस्व नियमावली में संशोधन पर भी विचार किया जा सकता है। भूखंडों की सटीक डिजिटल जानकारी उपलब्ध होने से भूमि प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

शत-प्रतिशत घरों की मैपिंग से बढ़ सकते हैं नगर निकायों के संसाधन

मुख्य सचिव ने नगर विकास विभाग के कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए प्रदेश के सभी घरों की स्पेस एप्लीकेशंस के माध्यम से मैपिंग कराने पर भी जोर दिया।उन्होंने भवन कर के दायरे में आने वाले शत-प्रतिशत घरों की पहचान और मैपिंग की आवश्यकता बताई। इससे नगर निकायों को संपत्तियों का सटीक आकलन करने और भवन कर से संबंधित व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही नगर विकास विभाग के राजस्व संसाधनों को मजबूत करने का रास्ता भी खुल सकता है।

आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

कार्यशाला में इन-स्पेस के निदेशक एयर वाइस मार्शल डी.बी. खोत ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, जमीनी स्तर पर विकास कार्यों और आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली से संबंधित प्रस्तुति दी।उन्होंने स्पेस एप्लीकेशंस को स्थानीय स्तर पर अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उपग्रह आधारित तकनीकों की मदद से आपदाओं के संभावित प्रभावों का आकलन करने और समय रहते जरूरी कदम उठाने में सहायता मिल सकती है।

कृषि, वन, जल और शहरी नियोजन में उपग्रह तकनीक की भूमिका

प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पंधारी यादव ने रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर, उत्तर प्रदेश की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि उपग्रह आधारित तकनीकों का उपयोग कृषि, वन, जल एवं भू-संसाधन प्रबंधन, शहरी नियोजन, बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा रहा है।वहीं, विशेष सचिव रमेश चन्द्र ने स्पेस टेक्नोलॉजी, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से प्रदेश के विकास को नई गति देने का आह्वान किया।

50 से अधिक विभागों के विशेषज्ञों ने लिया हिस्सा

दो दिवसीय कार्यशाला में नगर विकास, आवास, परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सिंचाई, वन और ग्रामीण विकास सहित प्रदेश के 50 से अधिक विभागों एवं जनपदों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।कार्यशाला में 22 इंडस्ट्री पार्टनर्स ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए। इसके अलावा 75 निजी फर्मों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई।इस दौरान रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर, उत्तर प्रदेश (आरएसएसी-यूपी) की ओर से तैयार अर्बन जियो-पोर्टल और बुकलेट का विमोचन भी किया गया।

पारदर्शी शासन और मजबूत होगी प्रदेश की स्पेस इकोनॉमी

कार्यशाला का मुख्य फोकस शहरी विकास, जल संसाधन, आपदा प्रबंधन, कृषि और ग्रामीण विकास में अंतरिक्ष तकनीकों के व्यावहारिक इस्तेमाल पर रहा।उपग्रह आधारित आंकड़ों और आधुनिक तकनीकों के बेहतर उपयोग से सरकारी योजनाओं की निगरानी, संसाधनों का आकलन और विकास कार्यों की योजना तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों की आय बढ़ाने, आपदाओं से बेहतर तरीके से निपटने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सटीक एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में काम किया जा सकेगा।कार्यशाला के माध्यम से प्रदेश में स्पेस टेक्नोलॉजी को विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली से जोड़ने और उत्तर प्रदेश की स्पेस इकोनॉमी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

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